7वा वेतन आयोग: चिट्ठियां आती थी…लिखा होता था सैलरी मत बढ़ाना बाबू काम नहीं करते!
नई दिल्ली। सेवंथ पे कमीशन को मंजूरी मिलने के साथ ही देशकोर्ट जज, जस्टिस अशोक कुमार माथुर से भास्कर के नवल सक्सेना और मुकुल सिंघवी ने हुई ख़ास बातचीत इंटरव्यू में एक बात भी निकल कर आई कि लोग इम्प्लॉइज की सैलरी न बढ़ाने को लेकर कमीशन को चिट्ठिभर में सेंट्रल गवर्नमेंट इम्प्लॉइज की सैलरी में बढ़ोतरी की चर्चा है इसी बीच कमीशन के प्रेसिडेंट व पूर्व सुप्रीम यां भी लिखते थे पढ़िए किस प्रश्न को लेकर जवाब में जस्टिस माथुर ने कहा, रेलवे इम्प्लॉइज का काम देखना है तो ट्रेन में आज भी साफ चद्दर नहीं मिलती…
इंटरव्यू के दौरान किये गए सवाल निम्न प्रकार है-
Q.-क्या भत्तों को लेकर सिफारिशाें में कोई विसंगति है जो सरकार लागू नहीं कर पाई है?
A.-सरकार पर वेतन बढ़ोतरी से ही एक लाख करोड़ से ज्यादा का बोझ आ गया है भत्तों से यह और बढ़ेगा शायद सरकार सिफारिशों को एक बार और जांचना चाहती हो इसीलिए एक कमेटी बनाकर चार महीने का समय लिया है।
Q- सरकार का कहना है कि वेतन वृद्धि से मांग बढ़ेगी, अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी, लेकिन महंगाई नहीं बढ़ेगी यह कैसे संभव है?
A- राजनीति मैं नहीं समझता हां, महंगाई तो बढ़ेगी ही आप सैलरी ग्रोथ अनाउंसमेंट से पहले यानी 28 जून और आज के भावों की ही तुलना कर लीजिए पता चल जाएगा महंगाई बढ़ी या नहीं इसका फायदा सवा करोड़ सरकारी कर्मचारियों को हो रहा है, इसका रिजल्ट महंगाई के रूप में सवा सौ करोड़ जनता को भुगतना होगा।
Q- 88 भत्तों को समाप्त करने और प्रेरणा भत्ते जैसे नए भट्टों को जोड़ने का क्या मतलब? जब अच्छी सैलरी है तो प्रेरणा के लिए पैसा क्यों?
A-साइकिल, हेयर कटिंग, फरलो जैसे भत्तों को हमने समाप्त करने की बात की है इनमें कई तो ऐसे हैं, जिनमें 50 पैसे से एक रुपए तक भत्ता था वहीं नए भत्ते परफॉर्मेंस आधारित हैं, जो अच्छा काम करेगा, उसे मोटिवेशन अलाउंस मिलेगा।
Q-वेतन तो बढ़ गया लेकिन कर्मचारियों की जवाबदेही के लिए क्या सिफारिशें की गईं?
A-हमने सिफारिश की है कि अब सिर्फ अच्छा करने से काम नहीं चलेगा कर्मचारी-अधिकारी बहुत अच्छा काम करें तभी वेतन वृद्धि और प्रमोशन (एमईसीपी) मिले अब रुटीन में यानी सिर्फ साल पूरे कर लेने पर न तो वेतन वृद्धि हो और न प्रमोशन 20 साल तक जो कर्मचारी प्रमोशन के लायक नहीं पाया गया, उसे घर बैठाओ ओवरटाइम का पैसा भी समाप्त करने का सुझाव हमने दिया।
Q-नियम सख्त किए, इससे सक्षम कर्मचारियों को नुकसान नहीं होगा?
A-त्रिवेदी कमेटी ने स्टडी कर इम्प्लॉइज के लिए लक्ष्य तक तय किए थे, लेकिन यह कुछ विभागों में ही लागू हुए कुछ ने तो अब तक नहीं अपनाया हमने टारगेट पूरे करने वालों के लिए कई तरह के इंसेंटिव की सिफारिश की है इसमें व्यक्तिगत, सामूहिक या विभागीय इंसेंटिव शामिल हैं।
Q-सियाचिन में सैन्य अधिकारी को हार्ड ड्यूटी अलाउंस 31 हजार रु. और पूर्वोत्तर में आईएएस अधिकारी को 61 हजार रु., विसंगति क्यों?
A-पूर्वोत्तर के आईएएस से ऐसी तुलना उचित्त नहीं है वहां विकास अभी-अभी शुरू हुआ है कोई अधिकारी वहां जाना नहीं चाहता था, ऐसे में आईएएस को अतिरिक्त फायदे दिए गए हैं इसी का परिणाम आज विकास के रूप में देखा जा सकता है दूसरी ओर सेना को हार्ड ड्यूटी के साथ, रिस्क अलाउंस, एमएसपी (मिलिट्री सर्विस पे) जैसे अन्य फायदे भी तो मिल ही रहे हैं वैसे हमने सेना के अफसर, जवान व नर्स के भत्ते बढ़ाने की सिफारिश भी की है।
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