Restructuring of Defence Forces रक्षा बलों का पुनर्गठन किया जाना

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Restructuring of Defence Forces रक्षा बलों का पुनर्गठन किया जाना

Restructuring of Defence Forces and Impact of ‘Atmanirbhar Bharat’ in Defence Manufacturing रक्षा बलों का पुनर्गठन किया जाना और रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भर भारत’ का प्रभाव

TO BE ANSWERED ON 08th August, 2022


Will the Minister of Defence be pleased to state:

(a) the status of the reforms and restructuring in our defence forces which were underway; and

(b) the impact of ‘Atmanirbhar Bharat’ in defence manufacturing with the involvement of both public and private sector?



(a): The modernization/reforms of Defence Forces is a continuous process based on threat perception, operational challenges and technological changes to keep the Armed Forces in a state of readiness to meet the entire spectrum of security challenges.

(b): In order to reduce arms dependency and promote indigenous manufacturing of defence equipment, a comprehensive revamped ‘Make and Innovation’ procedure has been introduced in DAP-20 to facilitate indigenous design and development of defence equipment by private participation both with Government funding and industry funding.

Progressive Promulgation of Positive Indigenisation Lists (PILs): A series of Positive Indigenisation Lists of defence weapons & equipment which would not be imported from abroad have been promulgated. 1st Positive Indigensation List comprising of 101 items was promulgated in August 2020, 2nd Positive Indigensation List comprising of 108 items was promulgated in May, 2021 & 3rd Indigensation List comprising of 101 items was promulgated in April, 2022.

The impact of ‘Atmanirbhar Bharat’ in defence manufacturing are as given below: –

(i) In line with the budget announcement for F.Y. 2022-2023 of allocating 25% of the Defence R&D budget for industry led R&D, 18 major platforms have been approved by the Government for industry led Design & Development under Make I, Make II, SPV Model and iDEX routes.

(ii) An innovation ecosystem for Defence titled Innovations for Defence Excellence (iDEX) has been launched in April, 2018 to foster innovation and technology development in Defence and Aerospace by engaging Industries including MSMEs, Start-ups, Individual Innovators, R&D institutes and Academia, and provide them grants/funding and other support to carry out R&D which has potential for future adoption for Indian defence and aerospace needs. So far, 125 problems have been opened, 136 startups have been engaged, 102 contracts have been signed.

(iii) iDEX route of procurement have been simplified and timelines have been compressed from 2 years earlier to just 5 months by reforming the trial process.

(iv) The Government has approved a Scheme with an outlay of Rs. 498.78 Crore (2021-22 to 2025-26) to push innovation and support startups in Defence & Aerospace sector. This will enable more than 300 startups to participate in the new design and development projects and also support 20 partner incubators.

(v) As part of the efforts to achieve self-reliance in Defence manufacturing and minimize imports by the DPSUs, a positive indigenization list has been notified by the Department. The list contains 2,500 imported items which have already been indigenized and 351 high value imported items which will be indigenized in next 3 years. Out of 351 items, 147 items have already been indigenised.

(vi) Another list of DPSUs for indigenization of 107 Line Replaceable Units (LRUs)/Sub-systems of high value platform was notified on 28.03.2022. As on date, 4 LRUs have been indigenized; 5 LRUs are at trial stage and 31 LRUs are at design and development stage.

(vii) An indigenization portal namely SRIJAN has been launched in August, 2020 for DPSUs/OFB/Services with an industry interface to provide development support to MSMEs/Startups/Industry for import substitution. So far, more than 21000 Defence items, which were earlier imported, have been displayed on the portal. 388 private vendors have expressed interest in indigenising more than 4700 items and so far 410 items have been indigenized.

(viii) Separate procedure for ‘Make-II’ category (Industry funded) has been notified to encourage indigenous development and manufacture of defence equipment. Number of industry friendly provisions such as relaxation of eligibility criterion, minimal documentation, provision for considering proposals suggested by industry/individual etc. has been introduced in this procedure. So far, 72 projects relating to Army, Navy & Air Force, have been accorded ‘Approval in Principle’. 38 Acceptance of Necessity (AONs), 05 prototypes developed and 2 procurement contracts have been signed by the Services.

(ix) Further, Make-II route of procurement have been simplified and timelines have been compressed from 2 years earlier to just 5 months by reforming the trial process.

(x) As part of ease of doing business, the export procedure has been simplified and made completely online. This has resulted in an exponential increase in the number of Export Authorizations issued.

(xi) Defence Testing Infrastructure Scheme (DTIS) has been formulated for creating 6 to 8 Greenfield Defence Testing Infrastructures in the country and attain “Atmanirbharta” in the Defence Testing Infrastructure for the domestic industry.

(xii) As part of the AzadiKaAmritMahotsav, the Government organised an event ‘AiDef’ on 11th July, 2022 where for the first time 75 defence specific Artificial Intelligence (AI) products were launched by Hon’ble RakshaMantri. During the event, three AI products of DPSUs were also launched for the market.


भारत सरकार
रक्षा मंत्रालय
सैन्य कार्य विभाग
राज्य सभा
अतारांकित प्रश्न संखया 2452
08 अगस्त, 2022 को उत्तर के लिए

रक्षा बलों का पुनर्गठन किया जाना

2452. श्री संदोष कुमार पी:
क्या रक्षा मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि :

(क) हमारे रक्षा बलों में पुनर्गठन और चल रहे सुधारों की स्थिति क्या है; और

(ख) रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों को शामिल किए जाने के कारण ‘आत्मनिर्भर भारत’ का क्‍या प्रभाव पड़ा है?


रक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री अजय भट्ट)

(क): सुरक्षा चुनौतियों के समग्र परिदृश्य को पूरा करने के लिए सशस्त्र बलों को तैयार रखने हेतु जोखिम अवधारणा, संक्रियात्मक चुनौतियों ओर प्रौद्योगिक चुनौतियों के आधार पर रक्षा बलों का आधुनिकीकरण/ सुधार एक सतत प्रक्रिया है।

(ख): हथियार निर्भरता को कम करने और रक्षा उपस्कर के स्वदेशी विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी वित्तपोषण और उद्योग वित्तपोषण दोनों के साथ निजी भागीदारी द्वारा रक्षा उपस्कर के स्वदेशी डिजाइन और विकास को सुगम बनाने हेतु डीएपी-20 में एक व्यापक संशोधित बनाओ और नवाचार’ प्रक्रिया की शुरुआत की गई है।

सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों (पीआईएलएस) की प्रगामी घोषणा रक्षा हथियारों और उपस्करों जिन्हें विदेश से आयातित नहीं किया जाएगा की सकरात्मक स्वदेशीकरण सूचियों की एक श्रेणी की घोषणा की गई है। पहली सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जिसमें 101 मर्दे शामिल हैं, की घोषणा अगस्त, 2020 में की गई थी, दूसरी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जिसमें 108 मर्दे शामित्र हैं, की घोषणा मई, 2021 में की गई एवं तीसरी स्वदेशीकरण सूची जिसमें 101 मर्दे शामिल हैं की घोषणा अप्रैल 2022 में की गई।

रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भर भारत’ का प्रभाव निम्नानुसार हैः

(i) वित्त वर्ष 2022-23 के लिए बजट घोषणा के अनुरूप रक्षा अनुसंधान और विकास के लिए आबंटित 25% उच्योग प्रेरित अनुसंधान और विकास के लिए मेक I, मेक II, एसपीवी मॉडल और आईडीईएक्स रुूटों के अंतर्गत उद्योग प्रेरित डिजाइन और विकास के लिए सरकार द्वारा 18 मुख्य प्लेटफॉर्मों को अनुमोदन दिया गया है।

(ii). एमएसएमई, स्टार्ट अप्स, निजी नवोन्मेषकों, अनुसंधान और विकास संस्थानों तथा शैक्षिक संस्थानों सहित उद्योगों को शामिल्र करके रक्षा और एरोस्पेस में नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास को आगे बढ़ाने तथा भारतीय रक्षा और एरोस्पेस आवश्यकताओं के लिए भविष्य में अपनाए जाने की संभावना वाले अनुसंधान और विकास करने में उन्हें अनुदान/ वित्तपोषण एवं अन्य सहायता उपलब्ध कराने के लिए अप्रैल 2018 में रक्षा उत्कृष्टता हेतु नवाचार (आईडीईएक्स) नाम से रक्षा के लिए एक नवाचार पारिप्रणाली शुरू की गई है। अब तक 125 समस्याएं प्रकट की गई हैं, 136 स्टार्ट अप्स को शामित्र किया गया है, 102 संविदाओं पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

(iii) खरीद के आईडीईएक्स रूट का सरलीकरण किया गया है और परीक्षण प्रक्रिया में सुधार करके समयसीमा जो पहले 2 वर्ष थी, को घटाकर मात्र 5 माह कर दिया गया है।

(iv) सरकार ने रक्षा और एरोस्पेस क्षेत्र में नवाचार को आगे बढ़ाने और स्टार्ट अप्स को सहायता देने के लिए 498.78 करोड़ रु. (2021-22 से 2025-26) के परिव्यय वाली एक स्कीम अनुमोदित की है। इससे 300 से अधिक स्टार्ट अप नई डिजाइन और विकास परियोजनाओं में भागीदार बनने तथा 20 सहभागी इनक्यूबेटरों को सहायता देने में भी समर्थ होंगे।

(v) रक्षा विनिर्माण में आत्मनिभरता प्राप्त करमे और डीपीएसयू द्वारा निर्यात को न्यूनतम करने के प्रयासों के एक भाग के रूप में विभाग द्वारा सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची अधिसूचित की गई है। इस सूची में 2500 आयातित मर्दे शामित्र हैं जिनका स्वदेशीकरण पहले ही किया जा चुका है और 351 उच्च मूल्य आयातित मर्दे जिनका स्वदेशीकरण अगले 3 वर्षों में किया जाएगा, शामिल्र हैं। 351 मर्दों में से 147 मदों का स्वदेशीकरण पहले ही किया जा चुका है।

(vi) 107 लाइन रिप्लेसेबल यूनिटों (एलआरयू)/ उच्च मूल्य प्लेटफॉर्म की उप-प्रणालियों के स्वदेशीकरण हेतु डीपीएसयू की एक अन्य सूची दिनांक 28.03.2022 को अधिसूचित की गई थी। अब तक 4 एलआरयू का स्वदेशीकरण किया जा चुका है; 5 एलआरयू परीक्षण चरण में हैं और ३31 एलआरयू डिजाइन और विकास चरण में हैं।

(vii) आयात प्रतिस्थापन के लिए एमएसएमई/ स्टार्ट अप्स/ उद्योग विकास सहयोग प्रदान करने हेतु उद्योग इंटरफेस के साथ डीपीएसयू / ओएफबी/सेवाओं के लिए अगस्त 2020 में सृजन नामक स्वदेशीकरण पोर्टल शुरू किया गया है। अब तक, पहले आयात की गई 21000 से अधिक रक्षा मदों को इस पोर्टल पर प्रदर्शित किया गया है। 388 निजी विक्रेताओं ने 4700 से अधिक मददों के स्वदेशीकरण में रुचि व्यक्त की है और अब तक 410 मदों का स्वदेशीकरण किया जा चुका है।

(viii) स्वदेशी विकास और रक्षा उपकरण के विनिर्माण को बढ़ावा देने हेतु ‘ मेक-II’ श्रेणी (उद्योग द्वारा वित्तपोषित) के लिए एक अलग प्रक्रिया अधिसूचित की गई है । इस प्रक्रिया में योग्यता मानदंडों में छूट, न्यूनतम दस्तावेजीकरण, उद्योग/व्यक्तिगत रूप से दिए गए प्रस्तावों पर विचार करने के लिए प्रावधान आदि जैसे कई उद्योग हितैषी प्रावधान शामिल किए गए हैं | अभी तक थलसेना, नौसेना एवं वायुसेना से संबंधित 72 परियोजनाओं को ‘सैद्धांतिक अनुमोदन’ प्रदान किया गया है | सेनाओं द्वारा 38 आवश्यकता हेतु स्वीकृति (एओएन), 05 विकसित प्रोटोटाइपों और 02 अधिप्रामि संविदाओं पर हस्ताक्षर किये गये हैं।

(ix) इसके अलावा, परीक्षण प्रक्रिया का सुधार करके अधिप्राप्ति के मेक-II रूट को सरल कर दिया गया है और समय सीमा जो पहले 2 वर्ष थी, को घटाकर मात्र 5 महीने तक कर दिया गया है।

(x) व्यापार के सुगमीकरण के भाग के रूप में, निर्यात प्रक्रिया को सरल और पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया गया है | इसके परिणामस्वरूप जारी किए गए निर्यात प्राधिकार पत्रों की संख्या बहुत बढ़ गई है।

(xi) रक्षा परीक्षण अवसंरचना योजना (डीटीआईएस) बनाई गई है ताकि देश में 6 से 8 ग्रीनफील्ड रक्षा परीक्षण अवसंरचनाओं के निर्माण हो सके और घरेत्रू उद्योग हेतु रक्षा परीक्षण अवसंरचना में “आत्मनिर्भरता” लाई जा सके।

(xii) आजादी का अमृत महोत्सव के भाग के रूप में, सरकार ने 11 जुलाई, 2022 को ‘एआई डीईएफ’ कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें पहली बार माननीय रक्षा मंत्री द्वारा 75 रक्षा विशेष आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स (एआई) उत्पाद लॉन्च किए गए थे | कार्यक्रम के दौरान, सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रम (डीपीएसयू) के तीन एआई उत्पाद भी बाजार के लिए लॉन्च किए गए थे।

Source: Rajya Sabha PDF