14 सितंबर, 2021 में हिंदी दिवस/सप्ताह/पखवाड़ा/माह का आयोजन – राजभाषा प्रतिज्ञा – हिंदी भाषा से संबंधित सूक्तियां

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14 सितंबर, 2021 में हिंदी दिवस/सप्ताह/पखवाड़ा/माह का आयोजन – राजभाषा प्रतिज्ञा – हिंदी भाषा से संबंधित सूक्तियां

14 सितंबर, 2021 में हिंदी दिवस/सप्ताह/पखवाड़ा/माह का आयोजन - राजभाषा प्रतिज्ञा - हिंदी भाषा से संबंधित सूक्तियां डॉ सुमीत जेरथ, आईएएस सचिव भारत स

सरकारी कामकाज (टिप्पण/आलेखन) मूल रूप से हिंदी में करने तथा अधिकारियों द्वारा हिंदी में डिक्टेशन देने के लिए प्रोत्साहन राशि में वृद्धि
भारत सरकार के अधीनस्थ कार्यालयों में राजभाषा पदों का पदनाम एवं वेतनमान वही होगा जो केंद्रीय सचिवालय राजभाषा सेवा संवर्ग का है: सचिव
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14 सितंबर, 2021 में हिंदी दिवस/सप्ताह/पखवाड़ा/माह का आयोजन – राजभाषा प्रतिज्ञा – हिंदी भाषा से संबंधित सूक्तियां

डॉ सुमीत जेरथ, आईएएस
सचिव

भारत सरकार
राजभाषा विभाग
गृह मंत्रालय

अ.शा. पत्र सं-11034/07/2021-रा.भा.(नीति)

दिनांक: 10 अगस्त 2021

आदरणीय महोदय,

विषय : 14 सितंबर, 2021 में हिंदी दिवस/सप्ताह/पखवाड़ा/माह के आयोजन के संबंध में ।

संदर्भ: कार्यालय ज्ञापन संख्या 1/14034/2/87- रा.भा. (का.-1) दिनांक 21.04.1987 एवं 23.09.87 (संलग्न)

अपनी भाषा के प्रति लगाव और अनुराग राष्ट्र प्रेम का ही एक रूप है। हिंदी ने सभी भारतवासियों को एक सूत्र में पिरोकर सदैव अनेकता में एकता की भावना को पुष्ट किया है। संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया। इस पावन दिवस की स्मृति में प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 1975 में राजभाषा विभाग की स्थापना की गई और यह दायित्व सौंपा गया कि केंद्र सरकार के सभी कार्यालयों/मंत्रालयों/उपक्रमों/बैंकों आदि में अधिक से अधिक कार्य हिंदी में किया जाना सुनिश्चित किया जाए।

2. संविधान सभा ने हम सबको यह संवैधानिक और प्रशासनिक उत्तरदायित्व सौंपा कि हम संविधान के अनुच्छेद 343 और 351 के अनुसार राजभाषा हिंदी का अधिकतम प्रयोग करते हुए प्रचार-प्रसार बढ़ाएं। अनुच्छेद 351 के अनुसार संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे, जिससे वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके और उसकी प्रकृति में हस्तक्षेप किए बिना हिन्दुस्तानी में और आठवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट भारत की अन्य भाषाओं में प्रयुक्त रूप, शैली और पदों को आत्मसात करते हुए और जहां आवश्यक या वांछनीय हो वहां उसके शब्द भंडार के लिए मुख्यतः: संस्कृत से और गौणतः अन्य भाषाओं से शब्द ग्रहण करते हुए उसकी समृद्धि सुनिश्चित करे।”

3. राजभाषा विभाग गृह मंत्रालय केंद्र सरकार के कार्यालयों/बैंकों/उपक्रमों आदि में राजभाषा हिंदी के संवर्धन के लिए सदैव ऊर्जावान और निर्रतर प्रयासरत है। अधिक से अधिक सरकारी कामकाज हिंदी में हो इसके लिए विभाग द्वारा सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और माननीय प्रधानमंत्री जी के आत्मनिर्भर भारत : स्थानीय के लिए मुखर हों (Self Reliant India – Be vocal for local) के अभियान को आगे बढ़ाते हुए राजभाषा विभाग द्वारा सी-डेक पुणे के माध्यम से निर्मित स्मृति आधारित अनुवाद टूल “कंठस्थ” के विस्तृत उपयोग पर जोर दिया जा रहा है जिससे अनुवाद के क्षेत्र में समय की बचत करने के साथ-साथ एकरूपता और उल्कृष्टता भी सुनिश्चित की जा सके। साथ ही बहुभाषी माध्यम से हिंदी स्वयं शिक्षण “लीला सॉफ्टवेयर” के भी प्रचार-प्रसार का काम किया जा रहा है।

4. राजभाषा संकल्प 1968 के अनुसार हमें हिंदी के प्रसार एवं विकास की गति को और तीव्र करना है, एक अधिक गहन एवं व्यापक कार्यक्रम तैयार करके, उसे कार्यान्वित करना है। अत: राजभाषा विभाग माननीय प्रधानमंत्री जी के स्मृति विज्ञान (Mnemonics) के प्रयोग से प्रेरणा लेते हुए 12 प्र (प्रेरणा, प्रोत्साहन, प्रेम, प्राइज(पुरस्कार), प्रशिक्षण, प्रयोग, प्रचार, प्रसार, प्रबंधन, प्रोन्नति, प्रतिबद्धता और प्रयास की रणनीति को लेकर अग्रसर हो रहा है।

5. राजभाषा नियम, 1976 के नियम 12 के अनुसार केन्द्रीय सरकार के प्रत्येक कार्यालय के प्रशासनिक प्रधान का यह उत्तरदायित्व है कि वह राजभाषा अधिनियम 1963, नियमों तथा समय-समय पर राजभाषा विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का समुचित रूप से अनुपालन सुनिश्चित कराएं, इन प्रयोजनों के लिए उपयुक्त और प्रभावकारी जांच-बिंदु बनवाएं और उपाय करें।

6. माननीय प्रधानमंत्री जी की अध्यक्षता में हुई पिछली केंद्रीय हिंदी समिति की बैठक में दिए गए निर्देशानुसार सामाजिक और सरकारी हिंदी के अंतर को कम करना है। आज ज़रूरत इस बात की भी है कि हम हिंदी को इसके सरल रूप में अपनाकर अपने सभी सरकारी कार्य हिंदी में करने को प्राथमिकता दें। हमें यह प्रण करना होगा कि हम अपने दैनिक कार्यों में हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करेंगे, यही संविधान का सच्चा अनुपालन होगा। इस संदर्भ में प्रसिद्ध कवि महावीर प्रसाद द्विवेदी जी का कथन हमें प्रेरित करता है कि “आप जिस तरह बोलते हैं, बातचीत करते हैं, उसी तरह लिखा भी कीजिए; भाषा बनावटी नहीं होनी चाहिए।

7. सरकार द्वारा कोरोना संबंधी जारी दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए हिंदी दिवस-2021 के शुभ अवसर पर सितंबर, 2021 में हिंदी दिवस/ सप्ताह/ पखवाड़ा/ माह का आयोजन/ प्रतियोगिताएं ऊर्जा, उत्साह और उल्लास के साथ की जाएं।

8. 14 सितंबर हिंदी दिवस-2021 के अवसर पर राजभाषा प्रतिज्ञा लें ताकि हम संविधान द्वारा दिए गए दायित्वों का निर्वहन कर सकें। (राजभाषा प्रतिज्ञा संलग्न है)।

9. विगत वर्ष की भांति ही मंत्रालयों/विभागों में प्रदर्शन हेतु हिंदी विद्वानों/विशिष्ट व्यक्तियों की सूक्तियों के पोस्टर/बैनर/स्टैंडी आदि बनाए जाएं। कुछ सूक्तियां संलग्न हैं।

10. राजभाषा हिंदी के प्रचार व प्रसार को प्रभावी एवं व्यापक बनाने के लिए मंत्रालय/विभाग अपने अधीनस्थ कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, राष्ट्रीयकृत बैंकों तथा वित्तीय संस्थाओं आदि को भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करें। यह भी अनुरोध है कि इस संबंध में की गई कार्रवाई से राजभाषा विभाग को अवगत कराएं।

जय राजभाषा! जय हिंद!

शुभेच्‍छु,

ह./-
(डॉ. सुमीत जैरथ)
सचिव, राजभाषा विभाग

भारत सरकार के सभी मंत्रालयों/विभागों के सचिव/केंद्र सरकार के उपक्रमों और सरकार के सभी मंत्रालयों/विभागों के सचिव/केंद्र सरकार के उपक्रमों और राष्ट्रीयकृत बैंकों के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक।


भारत सरकार
गृह मंत्रालय
राजभाषा विभाग
(सदैव ऊर्जावान ; निरंतर प्रयासरत)

राजभाषा प्रतिज्ञा

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 और 351 तथा राजभाषा संकल्प 1968 के आलोक में हम, केंद्र सरकार के कार्मिक यह प्रतिज्ञा करते हैं कि अपने उदाहरणमय नेतृत्व और निरंतर निगरानी से; अपनी प्रतिबद्धता और प्रयासों से; प्रशिक्षण और प्राइज़ से अपने साथियों में राजभाषा प्रेम की ज्योति जलाये रखेंगे, उन्हें प्रेरित और प्रोत्साहित करेंगे; अपने अधीनस्थ के हितों का ध्यान रखते हुए; अपने प्रबंधन को और अधिक कुशल और प्रभावशाली बनाते हुए राजभाषा- हिंदी का प्रयोग, प्रचार और प्रसार बढ़ाएंगे| हम राजभाषा के संवर्द्धन के प्रति सदैव ऊर्जावान और निरंतर प्रयासरत रहेंगे।

जय राजभाषा ! जय हिंद !

rajbhasha-pratigya


हिंदी भाषा से संबंधित सूक्तियां

1. राष्ट्रीय व्यवहार में हिंदी को काम में लाना देश की एकता और उतन्नति के लिए आवश्यक है।

महात्मा गांधी

2 भाषा की सरलता, सहजता और शालीनता अभिव्यक्ति को सार्थकता प्रदान करती है। हिंदी ने इन पहलुओं को खूबसूरती से समाहित किया है।

नरेंद्र मोदी (प्रधानमंत्री)

3 भारतीय सभ्यता की अविरल धारा प्रमुख रूप से हिंदी भाषा से ही जीवंत तथा सुरक्षित रह पाई है।

अमित शाह (गृह मंत्री)

4 हिंदी भाषा एक ऐसी सार्वजनिक भाषा है, जिसे बिना भेद-भाव प्रत्येक भारतीय ग्रहण कर सकता है।

मदन मोहन मालवीय

5 हिंदी राष्ट्रीयता के मूल को सींचती है और उसे दृढ़ करती है।

पुरुषोत्तम दास टंडन

6 हिंदी हमारे राष्ट्र की अभिव्यक्ति का सरलतम स्रोत है।

सुमित्रानंदन पंत

7 हिंदी राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।

डॉ. संपूर्णानंद

8 भारतीय भाषाएं नदियां हैं और हिंदी महानदी।

रवीन्द्रनाथ ठाकुर

9 हिंदी जैसी सरल भाषा दूसरी नहीं है।

मौलाना हसरत मोहानी

10 हिंदी द्वारा सारे भारत को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है।

स्वामी दयानंद

11 समस्त भारतीय भाषाओं के लिए यदि कोई एक लिपि आवश्यक हो तो वह देवनागरी ही हो सकती है।

जस्टिस कृष्णस्वामी अय्यर

12 वही भाषा जीवित और जागृत रह सकती है जो जनता का ठीक-ठाक प्रतिनिधित्व कर सके और हिंदी इसमें समर्थ है।

पीर मुहम्मद मूनिस

13 देवनागरी ध्वनिशास्त्र की दृष्टि से अत्यंत वैज्ञानिक लिपि है।

रविशंकर शुक्ल

14 हिंदी चिरकाल से ऐसी भाषा रही है जिसने मात्र विदेशी होने के कारण किसी शब्द का बहिष्कार नहीं किया।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

15 आप जिस तरह बोलते हैं, बातचीत करते हैं, उसी तरह लिखा भी कीजिए। भाषा बनावटी नहीं होनी चाहिए।

महावीर प्रसाद द्विवेदी

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