समूह ‘ग’ के पदों के अंदर पदोन्नति के लिए चयन हेतु 100% वस्तुनिष्ठ बहुविकल्प प्रश्नों की शुरुआत – के संबंध में स्पष्टीकरण: रेलवे बोर्ड आरबीई सं.122/2023

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समूह ‘ग’ के पदों के अंदर पदोन्नति के लिए चयन हेतु 100% वस्तुनिष्ठ बहुविकल्प प्रश्नों की शुरुआत – के संबंध में स्पष्टीकरण: रेलवे बोर्ड आरबीई सं.122/2023

समूह ‘ग’ के पदों के अंदर पदोन्नति के लिए चयन हेतु 100% वस्तुनिष्ठ बहुविकल्प प्रश्नों की शुरुआत – के संबंध में स्पष्टीकरण: रेलवे बोर्ड आरबीई सं.122/2023 दिनांक 07.11.2023

आरबीई सं.122/2023

भारत सरकार/GOVERNMENT OF INDIA
रेल मंत्रालय/MINISTRY OF RAILWAY
(रेलवे बोर्ड/ RAILWAY BOARD)

सं. ई(एनजी)/2018/पीएम1/4

नई दिल्‍ली, दिनांक 07.11.2023

महाप्रबंधक (कार्मिक)
सभी क्षेत्रीय रेलें/उत्पादन इकाइयां
(मानक डाक सूची के अनुसार)

विषय : समूह ‘ग’ के पदों के अंदर पदोन्नति के लिए चयन हेतु 100% वस्तुनिष्ठ बहुविकल्प प्रश्नों की शुरुआत – के संबंध में स्पष्टीकरण ।

English- Selection for promotion within Group ‘C’ posts: Clarification by Railway Board vide RBE No.122/2023

कुछ रेलों तथा उत्पादन इकाइयों द्वारा विभागीय चयन/सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा आदि में वस्तुनिष्ठ बहुविकल्प प्रश्नों से जुड़े कतिपय मुद्दों के संबंध में अपनाई जाने वाली पद्धति के बारे में स्पष्टीकरण मांगे गए हैं। बोर्ड द्वारा इस मामले की जांच की गई है तथा उठाए गए मुद्दों के संबंध में स्थिति निम्नानुसार है :

क्र. सं. प्रश्न स्पष्टीकरण
1 यदि प्रश्न-पत्र में त्रुटि है, अर्थात प्रश्न के चारों विकल्प (बहुविकल्प) में कोई भी सही उत्तर नहीं है; अस्पष्ट प्रश्न; गणित अथवा विज्ञान के गलत चिहन और यदि प्रश्न-पत्र बनानेवाला स्वयं प्रश्न-पत्र में अपनी त्रुटियां सूचित करता है तो उस स्थिति में क्या कार्रवाई की जानी चाहिए। रेलवे बोर्ड के दिनांक 09.06.2011 के पत्र सं 2010/ई(आरआरबी)/25/27 पार्ट के अनुसार, जो यह अनुबद्ध करता है कि जहां भी प्रश्न-पत्र में कोई प्रश्न गलत पाया जाए तो कृपांक देने के स्थान पर उसे मूल्यांकन की परिधि से हटा दिया जाए और प्रतिशत के आधार पर असंपूर्ण अंकों का आकलन किया जाए। यही नियम विभागीय परीक्षाओं के लिए भी अपनाया जाए।
2 प्रश्न के गलत होने की पहचान करने तथा ऐसे प्रश्न(प्रश्नों) को मूल्यांकन की परिधि से हटाने प्रश्न-पत्र बनाने वाला अथवा अगला उच्चतर प्राधिकारी।

 

विभागीय परीक्षा समाप्त होने के बाद उम्मीदवारों से आपत्तियां प्राप्त की जाएं। चयन बोर्ड के सदस्य अर्थात प्रश्न-पत्र बनानेवाला प्रश्नों/विकल्पों की परिशुद्धता का निर्णय लेगा तथा मूल्यांकक भी मूल्यांकन शुरू करने से पहले इसके बारे में स्वयं को संतुष्ट करेगा।

 

3 रेल भर्ती बोर्ड की चयन पद्धति तथा विभागीय चयन पद्धति अलग-अलग है, क्योंकि रेल भर्ती बोर्ड में उम्मीदवारों को सभी प्रश्न हल करने के निर्देश के साथ 100 प्रश्न दिए जाते हैं, जबकि विभागीय चयन में कुल 110 प्रश्न होते हैं अर्थात 100 + राजभाषा के  वैकल्पिक प्रश्न। कर्मचारियों को केवल 100 प्रश्न हल करने होते हैं। इस स्थिति में कुछ कर्मचारी गलत प्रश्न (प्रश्नों) को हल कर सकते हैं तथा शायद कुछ कर्मचारी गलत प्रश्न(प्रश्नों) को हल नहीं करें और प्रश्र-पत्र में पहले से उपलब्ध राजभाषा के अन्य प्रश्न(प्रश्नों) का उत्तर दें। ऐसी स्थिति में 2 प्रकार की उत्तर पुस्तिकाएँ उपलब्ध होंगी, पहली उन कर्मचारियों की जिन्होंने गलत प्रश्न(प्रश्नों) को हल किया है और दूसरी उन कर्मचारियों की जिन्होंने तथाकथित गलत प्रश्न (प्रश्नों) को हल नहीं किया है तथा गलत प्रश्न(प्रश्नों) के स्थान पर प्रश्न-पत्र में उपलब्ध अन्य प्रश्न(प्रश्नों) का उत्तर दिया है। समूह-ग से समूह ख में पदोन्नति के लिए चयनों तथा सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा में अपनाई जा रही पद्धति को समूह ग चयन/सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा में भी लागू किया जाए।

“उसमें मौजूद कुछ प्रश्न(प्रश्नों)/उत्तर(उत्तरों) के गलत होने की स्थिति में, दिनांक 09.06.2011 के पत्र से. होने की स्थिति में, दिनांक 09.06.2011 के पत्र सं. 2010/ ई(आरआरबी)/ 25/27 में यथा निर्धारित पद्धति को केवल उन उम्मीदवारों के लिए अपनाया जाए जिन्होंने उस/उन गलत प्रश्न(प्रश्नों) को हल किया है अथवा गलत उत्तर(त्तरों) वाले प्रश्न(प्रश्नों) को हल किया है। यह वैकल्पिक प्रश्न(प्रश्नों) वाले प्रश्न-पत्र(पत्रों) के लिए लागू होगा।”

4 क्‍या विभागीय चयनों में अपनाई जाने वाली पद्धति के बारे में उम्मीदवारों (कर्मचारियों) को पहले से सूचित किया जाए। वर्तमान में अपनाई जा रही पद्धति को जारी रखा जाए अथवा सभी मौजूदा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जहां आवश्यक हो वहाँ आशोधन किए जा सकते हैं। गलत उत्तर होने की स्थिति में प्रश्नों को हटाने की व्यवस्था का अधिसूचना में उल्लेख किया जाए।
5 क्या ऐसे प्रश्नों की अधिकतम संख्या की कोई सीमा है जिन्हें मूल्यांकन की परिधि से हटाया जा सकता है और यदि गलत के रूप में चिन्हित प्रश्नों की संख्या उस निश्चित सीमा को पार कर जाती है तो क्या लिखित परीक्षा को रद्द करने का कोई आदेश है? ऐसी कोई सीमा नियत नहीं की गई है।

इससे दक्षिण मध्य रेल के दिनांक 08.07.2021 के पत्र सं. पी(आर)605/XIV, सवारी डिब्बा कारखाना के दिनांक 26.04.2021 के पत्र सं. आईसीएफ/विज./2021/पीसी/285, उत्तर मध्य रेल के दिनांक 06.06.2022 के पत्र सं. 797-ई/एनसीआर/पॉलिसी/सेलेक्शन/2022 तथा बनारस रेल कारखाना के दिनांक 02.09 2023 के पत्र सं. जीएम(पी)सीसी/सेलेक्शन/पॉलिसी का निपटान हो गया ।

कृपया पावती दें।

(संजय कुमार)
उप निदेशक स्थापना (अराज.)
रेलवे बोर्ड

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