रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को चुनौती दी है. उन्होंने कहा है कि मुझे नहीं लगता कि 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें रह पाएंगी. उनके बयान का बड़े पैमाने पर असर हो सकता है. सशस्त्र बलों की ओर से पहले भी पेंशन के मसले पर वह कड़े विरोध का सामना कर चुके है.
7वें वेतन आयोग की सिफारिशों में जटिलताएं
पर्रिकर ने इंडिया टुडे से कहा कि 7वां वेतन आयोग फिलहाल सिफारिशों के रूप में हैं. मुझे नहीं लगता कि वह सिफारिशें रह पाएगी. मैं इस पर आखिरी तौर पर विचार नहीं कर सकता. मैंने कुछ जटिल बिंदुओं को चिन्हित किया है और आगे भी सही स्तर पर उसे ठीक से चिन्हित करूंगा.
सभी विभागों के एक प्रमुख का ड्राफ्ट तैयार
रक्षा विभाग के कर्मचारियों के पहले प्रमुख की तैनाती के बारे में पर्रिकर ने बताया कि इस मामले में ड्राफ्ट तैयार हो रहा है. साथ ही हम इस पर राय भी साझा कर रहे हैं. इस मामले में कोई रुकावट नहीं है और जल्द ही इसे कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा.
नियुक्तियों में टिकाऊपन की जरूरत
पर्रिकर ने सशस्त्र बलों की नियुक्ति को लेकर कहा कि इसके तरीके को बदलने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि हमें अधिग्रहण या इंजीनियरिंग में ज्ञान को बनाए रखना होगा. लंबी अवधि तक लोगों को टिककर ज्ञान साझा करना ही चाहिए. कई मामलों में बहुत अधिक रोटेशन की जरूरत नहीं होती. लोगों के ध्यान में लाने के लिए यह सूचना दी जा चुकी है. उन्होंने कहा कि मामले को लेकर कैसे आगे बढ़ा जाए, इस पर चर्चा की जा रही है. इसका असर पर व्यक्तिगत नीतियों पर भी होता है.
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